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: संत श्री नागर जी प्रेरणा से आदिवासी बाहुल्य देदला गांव में दो  दशक पूर्व जगा गौ सेवा का अलख आज बन चुका वट वृक्ष,50 गायों से आरंभ हुई गौशाला में अब है 300 गाये

Admin

Mon, Feb 19, 2024


मांस मदिरा का सेवन करने वाले आदिवासी अब सात्विक जीवन के साथ गौ माता की कर रहे सेवा,संत श्री के सानिध्य में विशाल गौशाला का हुआ निर्माण  

आरिफ शेख
सरदारपुर। सरदारपुर तहसील का आदिवासी बाहुल्य ग्राम देदला माही परियोजना के उप मुख्य बांध के बैक वाटर के चलते विस्थापित गांव की पीड़ा झेल चुके आदिवासियों का सामाजिक जीवन पहले मांस मदिरा का सेवन करने वाले लोगों के तौर पर जाना जाता था। 1992 के समय यहा पर मालव माटी मे माँ सरस्वती के वरद पुत्र पंडित कमल किशोर जी नागर का आगमन हुआ और ग्राम पटेल रामकिशन पटेल के घर पर खाटले पर बैठकर संत श्री ने मालवी भाषा मे दो घंटे तक धारा प्रवाह संत्सग दिये फिर क्या था इस गांव के आदिवासियों का सामाजिक जीवन ही परिवर्तन हो गया।

सत्संग और भक्ति के मार्ग पर इस गांव के आदिवासियों के पग ऐसे पढे और संत श्री का जो सानिध्य मिला और अब देदला गांव की एक अलग पहचान स्थापित हो गई। 1992 में संत श्री की प्रेरणा पाकर यहा पर 50 गायो से श्री वृंदावन धाम गौशाला की स्थापना हुई थी जो आज एक वट वृक्ष बनकर 300 गायों के विशाल समूह के साथ संचालित हो रही हैै।


संत श्री ने इस गांव के अनुयायियों को एक परिवार की तरह ही देखा है । समय-समय पर संत श्री नागर जी का सानिध्य इस ग्राम को मिलता रहा। इस वर्ष डोल ग्यारस के पर्व पर करीब एक सप्ताह तक संत श्री का विश्राम श्री वृंदावन धाम गौशाला पर हुआ जहा पर संत श्री ने डोल ग्यारस पर्व पर एक दिन के सत्संग देकर स्वंय के सानिध्य मे गौशाला मे गौ माता के लिये विशाल डोम का निर्माण करवाया वही गौशाला परिसर मे मां शबरी का मंदिर भी बनवाया जिसकी विधीवत प्राण प्रतिष्ठा श्रीमद भागवत कथा आयोजन के दौरान होगी।


गुरु पूर्णिमा पर्व पर जहा संत श्री नागर जी सेमली स्थित हाटकेश्वर धाम पर श्रद्धालुओं का सत्संग देते है। वही झाबुआ जिले के भुराडाबरा मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर अनुयायियों के बीच पर्व मनाते ही। ठीक इसी तरह अब प्रतिवर्ष डोल ग्यारस पर्व पर भी संत श्री का सानिध्य आदिवासी बाहुल्य देदला की श्री वृंदावन धाम गौशाला मे मिलेगा।


माही परियोजना के काली कराई बांध की बैक वाटर के किनारे स्थित श्री वृंदावन धाम गौशाला प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से काफी सुंदर है। गौभक्त तन मन धन से यहा पर गौ माता की सेवा मे लगे रहते है। जो भी यहा पहली बार आता है वह इसके प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत नजर आता है। वैसे इस गांव के आदिवासियों का गौमाता के प्रति सेवा का भाव देखकर हर किसी का सर इनके प्रति श्रद्धा से झुक जाता है की एक संत की वाणी ने इनका जीवन सार्थक कर दिया।  

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