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: जल संसाधन विभाग की लापरवाही कही किसानों के लिये आफत ना बन जाये,मौलाना के बाद सगवाल और हातोद तालाब पर भी मंडराया खतरा,सगवाल मे पाल पर हुये गड्ढे,हातोद मे किसान स्वयं के खर्चे पर करवा रहे मरम्मत

सरदारपुर। जल संसाधन विभाग द्वारा 40 वर्ष पूर्व बनाए गये मौलाना तालाब के फुटने की खबर फैलते ही विभागीय लापरवाही के किस्से एक के बाद एक किसान बया कर रहे है। कही पर पाल क्षतिग्रस्त हो रही है तो कहीं पर किसान स्वयं अपने खर्चे से ही तालाब की मरम्मत करवा रहे है। जिस तरह शुक्रवार की शाम को मुसलाधार बारिश हुई यदि ऐसी ही बारिश और हो जाती है तो सिंचाई विभाग के 62 मे से कुछ और तालाब क्षतिग्रस्त हो जायेगे।


सिचाई विभाग के अंतर्गत आने वाले सगवाल तालाब की बात करे तो कल रात मे हुई तेज बारिश के बाद तालाब की पाल के उपर से पानी बह गया। ग्रामीणों ने बताया की तालाब की पाल क्षतिग्रस्त हो रही है पाल पर कंटीली झाडियों की छटाई भी विभाग के द्वारा नहीं कराई गई। किसानों ने बताया की पाल पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे हो चुके है जिनकी गहराई एक मीटर तक है।


वही आंबा सोटी मे स्थित इंदिरा गांधी जलाशय जिसका पिछले दिनो ही केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने निरीक्षण कर मरम्मत करने के निर्देश दिये थे। निरीक्षण के बाद स्पील चैनल का फ्लस बार को मिट्टी डालकर सुधार किया गया था। सूत्र बताते है की रात मे हुई तेज बारिश से जो सुधार कार्य किया गया था वह बह गया जिसके चलते तालाब से करीब 3 मीटर पानी नदी मे चला गया। जिसके कारण किसानों को रबी की फसल मे सिंचाई के लिये पर्याप्त पानी नहीं उपलब्ध हो पायेगा।


ऐसी ही लापरवाही हातोद क्रमांक 1 के तालाब पर भी देखने को मिल रही है। भाजपा नेता एंव किसान गंगाराम पाटीदार ने बताया की तालाब की पाल क्षतिग्रस्त हो रही है। विभाग कोई ध्यान नही देता यही नही तालाब सुरक्षित रहे इसके लिये किसान स्वंय के खर्चे पर मुरम डालकर तालाब की पाल को सुरक्षित किये हुये है।
श्री पाटीदार ने बताया की तालाब की पाल पर कंटीली झाड़ियां भी साफ नही की गई है। यदि तालाब फुटता है तो जन हानी होने के साथ ही इसके निचले क्षेत्र मे स्थित कई तालाबों को भी नुकसान हो सकता है।
किसान गंगाराम पाटीदार ने बताया की तालाब को लेकर न्यायालय मे भी प्रकरण चल रहा है। जिसमे भी विभाग मजबुती के साथ पक्ष नहीं रख पा रहा है।

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