ये नए युग का भारत है, घर में घुसकर मारते है -कवि डॉ. लोकेश जड़िया : राणा प्रताप विरले होते है, झुकते कभी नहीं है,तीर, तमंचो, तलवारो से, रूकते कभी नहीं है - कवि डॉ संदीप शर्मा
Bakhtavar Express
Tue, Oct 20, 2026
अनवर मंसुरी@ नागदा (धार)। आदर्श मित्र मंडल नवदुर्गा उत्सव समिति पुराना पेट्रोलपम्प नागदा द्वारा 9 वे वर्ष में सोमवार रात्री अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। देर रात्री तक कवियों ने अपनी काव्य रचनाओं से काव्य प्रेमियों को खुब गुदगुदाया। कवि सम्मेलन के पूर्व ख्याति प्राप्त कवि डॉ संदीप शर्मा धार का आदर्श मित्र मंडल सदस्यो द्वारा नगर की ओर से शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर व साफा बांधकर नागरिक अभिनंदन किया। उपस्थित सभी कवियों का मंडल सदस्यों ने केसरिया दुपट्टा व पुष्प माला पहनाकर व स्मृति चिन्ह प्रदान स्वागत किया। कवि सम्मेलन की शुरूआत संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि डॉ संदीप शर्मा धार ने अपने हास्य अंदाज में कवियों के परिचय के साथ की।

शुरूआत श्रृंगार रस की कवयित्री सुमित्रा सरल प्रतापगढ़ ने सरस्वती वंदना वरदायिनी की जय सदा, हर भाव को देती रहे, हो शब्द की शुभ सम्पदा, वरदायिनी की जय हो सदा से की के साथ की। हास्य कवि शंकर सिसौदिया घोसला ने हास्य के फुंवारों के बीच हर घड़ी, हर वक्त काम आयेंगे, मन से पुकारो मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम आयेंगे, श्रोताओं के बीच अपनी बात रखी। कवि रजनीश शर्मा सीतामउ ने संस्कृति के अनुरूप परिवेश रहना चाहिए, शिराओ में रक्त का आवेश रहना चाहिए, राजनीतिक दल भले ही अलग-अलग हो, हमारे जिन्दा सभी के दिलांे में भारत रहना चाहिए, वीर रस के कवि राहुल शर्मा उज्जैन ने बाहों के तेरे ठंड में दुशाला ना मिला, बिस्तर पर चाय का प्याला ना मिला, कच्ची-पक्की रोटियों से भर गया मन, माँ मुद्दत से तेरे हाथ का निवाला नहीं मिला, वहीं अपनी ओजस्वी वाणी से राष्ट्रहित की रचना से श्रोताओं में जोश भरा। हास्य कवि हिमांशु बवंडर मुम्बई ने हास्य रचनाओं से काव्य प्रेमियों को हंसाते हुए एसी की ठंडक ना दे, बुढ़े पीपल की छांव तो देदे, कांक्रिटों के जंगल ना दे, बचपन वाला गांव तो देदे, जर, जोरू, जमीन सब फिजुल है यहां, मुझे मेरी मां के जन्नत वाले पांव तो देदे, कवियित्री सुमित्रा सरल ने जो तू कहता है मैं उस बात को ही मान लेती हुं, तेरी धड़कन को मिलो दूर से पहचान लेती हंु, अदाकारी ये मेरे सामने तू मत दिखा दिलबर, तेरी आवाज सुनकर मैं सबकुछ जान लेती हुं, गीत-गजल श्रृंगार से अपनी काव्यरचना रखी। हास्य कवि डॉ. लोकेश जड़िया नागदा-धार ने अपने अनोखे अंदाज में अपने गृहक्षेत्र में काव्यपाठ करते हुए श्रोताओं को खुब हंसाते हुए हम बुद्ध बनकर युद्ध टाले, युद्ध से ही केशव तारते हैं, ये नए युग का नया भारत है, घर में घुसकर मारते हैं से सबका ध्यान खींचा। देश के ख्याति प्राप्त कवि मंच संचालक डॉ. संदीप शर्मा धार ने संचालन करते हुए काव्य श्रोताओं को बांधे रखा। संदीप शर्मा ने काव्यपाठ करते हुए राणा प्रताप विरले होते है, झुकते कभी नहीं है, तीर, तमंचो, तलवारों से रूकते कभी नहीं है, फिर भी झुका नहीं पाये वो भगवा स्वाभिमान, जिसकी देशभक्ति से प्रेरित घोड़े दे दे जान, कुछ ऐसा नेता फिर भारत को देदे भगवान, देर रात्रि तक कवि सम्मेलन में समा बांधे रखा।

आयोजन में पहुँचे अतिथि भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुनिल मोदी, किराना व्यापारी संघ अध्यक्ष राजेन्द्र बोकड़िया, नितेश सुराना, भाजपा मण्डल अध्यक्ष दिलीपसिंह सोलंकी, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि इन्दरसिंह पटेल, किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष महेश जाट, अशोक सोलंकी, अनोखीलाल राठौड़, पंकज दग्दी, अमन पांडे व मंचासीन अतिथियों का आदर्श मित्र मंडल माकनी सदस्यों ने दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। अतिथियों ने भारत माता का पूजन कर कार्यक्रम की शुरूआत की। देर रात्री तक चले कवि सम्मेलन में आसपास गाँव के सैकड़ो काव्यप्रेमियों ने काव्यपाठ का आनंद लिया।
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