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अमझेरा के गौरव और ₹3100 करोड़ की रेलवे विसंगति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, टेंडर रोकने की मांग

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शहीद राजा बख्तावर सिंह की भूमि अमझेरा की उपेक्षा : अमझेरा के गौरव और ₹3100 करोड़ की रेलवे विसंगति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, टेंडर रोकने की मांग

Bakhtavar Express

Tue, Sep 22, 2026

घने जंगलों को नष्ट कर जामनिया के रास्ते तिरला रेल लाइन ले जाने का विरोध,जामनिया के वीरान जंगल में प्रस्तावित स्टेशन से देश-विदेश के श्रद्धालुओं की सुरक्षा को गंभीर खतरा।

अमझेरा। धार-छोटा उदयपुर ब्रॉडगेज रेल परियोजना में रेलवे प्रशासन द्वारा की जा रही गंभीर तकनीकी विसंगतियों, अरबों रुपये के सार्वजनिक धन की बर्बादी और ऐतिहासिक नगर अमझेरा की निरंतर उपेक्षा के खिलाफ अब कानूनी रूप से आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है। अमझेरा के नागरिक और व्यवसायी यदुनंदन गुप्ता ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India), नई दिल्ली के समक्ष एक विस्तृत रिट पत्र याचिका (जनहित याचिका) दायर की है। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय को कानूनी नोटिस जारी कर आगामी निविदाओं (Tenders) को तुरंत रोकने की चेतावनी दी गई है।₹3100 करोड़ की वित्तीय बर्बादी और पर्यावरण का विनाश:

याचिकाकर्ता यदुनंदन गुप्ता ने बताया कि रेलवे के स्वयं के नवंबर 2024 के आधिकारिक प्रोजेक्ट रिकॉर्ड के अनुसार, वर्तमान प्रस्तावित रूट (टांडा से तिरला वाया जामनिया जंगल) अत्यंत दुर्गम और खर्चीला है। इस रूट पर 237.385 हेक्टेयर घने वन क्षेत्र का विनाश होगा, 50 मीटर तक ऊंचे बैंक (वायाडक्ट/पुल) बनाने होंगे और बेसाल्ट चट्टानों में 30 मीटर तक की गहरी कटिंग करनी पड़ेगी। इस पूरे विनाशकारी प्रोजेक्ट पर जनता के लगभग ₹3100 करोड़ फूंके जा रहे हैं। जबकि इसके विपरीत, यदि रेलमार्ग को सीधे अमझेरा से जोड़कर टांडा रोड की तरफ लाया जाए, तो यह कार्य मात्र ₹1200 से ₹1300 करोड़ में बेहद सुगमता से संपन्न हो जाएगा और सरकार के करीब ₹1800 करोड़ बचेंगे।

सुरक्षा का गंभीर संकट—वीरान क्षेत्र में स्टेशन:

याचिका में सबसे गंभीर मुद्दा यात्रियों की सुरक्षा का उठाया गया है। रेलवे प्रशासन अमझेरा जैसे सुरक्षित और विकसित केंद्र को छोड़कर, यहाँ से 10 किलोमीटर दूर जामनिया ग्राम के पहुंच-विहीन, सघन वन क्षेत्र में स्टेशन बनाने जा रहा है। इस वीरान और असुरक्षित इलाके में स्टेशन बनने से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की जान-माल को हर पल गंभीर खतरा रहेगा। रेलवे जानबूझकर यात्रियों को सुरक्षा जोखिम में धकेल रहा है।

धार्मिक तीर्थों और शहीदों की भूमि का अपमान:

अमझेरा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान शहीद राजा बख्तावर सिंह सहित 29 वीरों की अमर बलिदान भूमि है। इसके साथ ही पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही पवित्र स्थान है जहाँ से भगवान श्रीकृष्ण ने माता रुक्मिणी का हरण किया था, जिसके लिए मध्य प्रदेश शासन यहाँ भव्य "श्रीकृष्ण लोक" का निर्माण करा रहा है। यह जैन धर्म के प्रसिद्ध 108 पार्श्वनाथ तीर्थों में से एक "अमीझरा पार्श्वनाथ" का मूल स्थान भी है। इन अंतरराष्ट्रीय तीर्थों की अनदेखी कर रेलमार्ग को 6 किलोमीटर दूर जंगल से निकालना इस क्षेत्र के इतिहास और आस्था के साथ क्रूर मजाक है।

रेलवे की बहानेबाजी उजागर:

याचिका में साक्ष्यों के साथ उजागर किया गया है कि पश्चिम रेलवे ग्रेडिएंट (ढलान) का झूठा बहाना बना रहा है। स्वयं पश्चिम रेलवे ने पूर्व में स्वीकार किया था कि इस समस्या को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से टनल (सुरंग) बनाकर आसानी से हल किया जा सकता है। जब देश के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों (कश्मीर व कोंकण) में टनल से ट्रेनें चल सकती हैं, तो मालवा में इसकी अनदेखी क्यों की जा रही है? इस विसंगति को लेकर क्षेत्रीय माननीय सांसद श्रीमती सावित्री ठाकुर भी रेल मंत्रालय को दो बार आधिकारिक पत्र लिख चुकी हैं, लेकिन अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया।

टेंडर प्रक्रिया को रोकने की मांग:

चूंकि इस विवादित रूट के अंतर्गत आगामी निविदाएं (टेंडर्स) प्रक्रिया में हैं, इसलिए याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से मांग की है कि इस याचिका के लंबित रहने तक वर्तमान रूट पर किए जा रहे भूमि अधिग्रहण, मुआवजे के वितरण और निर्माण संबंधी निविदाओं पर तुरंत अंतरिम रोक (Stay Order) लगाई जाए। रेलवे बोर्ड, रेल मंत्री और महाप्रबंधक पश्चिम रेलवे को भी लिखित रूप से चेतावनी दी गई है कि न्यायालय के संज्ञान में मामला होने के बावजूद यदि टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, तो इसे न्यायिक अवमानना के रूप में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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