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: लोकतंत्र के महापर्व मे आहुति देने के लिये आतुर मतदाता अंतिम समय तक खामोश,आत्मविश्वास से लबरेज भाजपा कर रही जीत का दावा,तो कांग्रेस 2003 की हार से सबक लेकर सर्तकर्ता के साथ रख रही हर कदम,जयस भी भाजपा-कांग्रेस का खेल बिगाडने को लेकर सक्रियता के साथ मैदान मे

सरदारपुर। लोकतंत्र के महापर्व पर इस बार उत्साह,उमंग के साथ राजनीतिक दलों ने त्योहारों के बीच मैदान नापकर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिये कोई कसर नहीं छोडी। सरदारपुर विधानसभा मे इस बार त्रिकोणीय संघर्ष के चलते मुकाबला रोचक होने के आसार  गली चौराहे पर सुने जा रहे है लेकिन मुकाबला आमने सामने का होगा या फिर त्रिकोणीय संघर्ष का यह तो चुनाव परिणाम वाले दिन ही पता चल पायेगा। कांग्रेस भाजपा के साथ जयस के बैनर तले निर्दलीय मैदान मे उतरे युवा राजेन्द्र सिंह गामड़ ने प्रचार प्रसार मे कोई कसर नहीं छोड़ी युवाओं की मजबूत टीम के साथ इस युवा ने पूरी विधानसभा मे धुआंधार तरीके से प्रचार किया।


इस बार जहां भाजपा जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रही है। उत्साह एवं आत्मविश्वास से लबरेज पार्टी प्रत्याशी वेलसिंह भूरिया से लेकर युवा कार्यकर्ता तक भाजपा की जीत का दावा कर रहे है। बरमंडल मे सीएम की सभा एंव अंतिम दिन युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओ की वाहन रैली के साथ भाजपा जीत के प्रति आश्वस्त दिखाई दे रही है। लेकिन फिर भी अंदरूनी बगावत का डर सता रहा है। मतदान के अंतिम दिन रात्रि मे मैदानी जमावट मे कार्यकर्ता कोई कसर नही छोड रहा है। बूथ तक मतदाताओं को लाने के लिये युवा मोर्चा की टीम सक्रियता के साथ मैदान मे सक्रिय है।


वही कांग्रेस की बात करे तो कार्यकर्ता उत्साह से लबरेज तो नजर आ रहा है। लेकिन 2003 के चुनावी संघर्ष के बाद पूरी तरह सतर्क रहकर इस बार कांग्रेस मैदानी जमावट कर रही है। 2003 मे भी कांग्रेस की ओर से प्रताप ग्रेवाल मैदान मे थे जो अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के चलते जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे थे। लेकिन जब भाजपा के युवा प्रत्याशी वेलसिंह भूरिया ने अंतिम दौर मे की मतगणना मे बढ़त बनाकर 500 से अधिक मतो से ग्रेवाल को पराजित किया था। उसी हार से सबक लेकर कांग्रेस दुध का जला छांछ फुंक फुंक कर ... की रणनीति पर आगे बढ़कर मैदान मे उतरी है।

वैसे कांग्रेस को जयस के राजेंद्र सिंह गामड की खुली बगावत का सामना करना पड रहा है। राजेन्द्र गामड़ का परिवार कांग्रेसी था पुर्व मे उनकी मॉ कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर जिला पंचायत सदस्य भी बनी थी।
वैसे मतदाता अंतिम समय तक खामोश नजर आ रहा हैै। कोई कांटे का मुकाबला बता रहा है तो कोई भाजपा तो कोई कांग्रेस की जीत का दावा कर रहा है। वैसे पलायन के बीच मतदान का प्रतिशत कितना होगा यह सबसे महत्वपूर्ण होगा। अधिक मतदान का प्रतिशत कांग्रेस को फायदा पहुंचेगा या भाजपा को यह तो 3 दिसंबर को पता चलेगा।

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