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: नगरों एवं बड़े गांवो मे भाजपा को मिली भारी बढ़त को मजरो टोलो ने किया ध्वस्त,मजरो मे लाडली बहना रही बेअसर,राजगढ़,अमझेरा,दसाई,राजोद,छडावद और भानगढ़ मे भाजपा को मिली बम्पर बढ़त,चारो जिला पंचायत सदस्य भी अपने क्षेत्रों मे पार्टी को नही जिता पाये,पाच मे से तीन मंडल मे भाजपा को मिली हार


आरिफ शेख
सरदारपुर। जीत जीत होती है और हार हार होती है भले ही वह एक मत की हो। विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद अब हार जीत को लेकर चर्चा का दौर भाजपा मे शुरू हो चुका है।
सरदारपुर विधानसभा मे  भाजपा जहा अपनी जीत को लेकर शुरू से ही अति आत्मविश्वास मे थी  जो कही ना कही उसकी हार का कारण बना। लाडली बहना जैसी योजना के बाद भाजपा की हार कई सवाल खड़े करती है। संगठन केवल कागजों पर था या फिर धरातल पर था इसको लेकर आने वाली बैठक मे शायद पार्टी नेतृत्व चर्चा  करेगा। कांग्रेस से अधिक भाजपा का संगठन सरदारपुर विधानसभा मे  मजबूत था  यही नहीं कांग्रेस के मुकाबले भाजपा मे बैठके एवं सम्मेलन भी अधिक  हुये। बूथ ,मंडल,पन्ना प्रमुख  सहित कई संगठन होगे जिन्होने बुथ स्तर  तक भाजपा को मजबूत करने के लिये  कोई कसर नहीं छोड़ी होगी। सरदारपुर विधानसभा भाजपा की आकांक्षा सीट मे शामिल थी। जहां पर भाजपा को रणनीति के तहत काफी समय पहले प्रत्याशी का चयन करना था।  लेकिन करीब आधा दर्जन दावेदारों मे से पार्टी को प्रत्याशी का चयन करने मे काफी समय लगा। अंतिम दौर मे प्रत्याशी का चयन होना साथ  ही पार्टी की जो सर्वे टीम विधानसभा स्तर पर घूम रही थी वह अपनी पहचान नहीं छुपा सकी। यह टीम धरातल पर जनता के मुड को भांप नही सकी। वही प्रत्याशी चयन को लेकर शीर्ष नेत्रतव को इस टीम ने जो फीडबैक दिया था वह भी समझ से परे था।


वैसे पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना मे  जरूर भाजपा ने यहा पर अच्छी वापसी की है। पिछले चुनाव मे जहां भील-भिलाला कार्ड भी जमकर चला था जिससे भाजपा को नुकसान हुआ था। लेकिन इस बार भील प्रत्याशी उतारने से भाजपा ने बराबरी से मुकाबला किया। 4128 मतो की हार के बाद आंकड़ों की बात करे तो नगर से लेकर बड़े गांवो मे भाजपा को अधिक मत मिले लेकिन मजरो  टोलो मे भाजपा को मत नहीं मिले। यह भी भाजपा की हार का बड़ा कारण रहा। पिछले विधानसभा चुनाव मे 273 बूथ मे से कांग्रेस को 197 बूथ पर और भाजपा को 76 बुथ पर बढ़त मिली थी। वही 2023 के चुनाव मे भाजपा ने 147 बूथों पर बढत ली। इस प्रकार सीधे तौर पर कांग्रेस की 71 बूथों पर बढ़त कम हुई लेकिन फिर भी वह जीत गई।


5 मे से 3 मंडल पर हारी भाजपा- इस विधानसभा चुनाव मे चारो जिला पंचायत सदस्य भी अपने-अपने जिला पंचायत  क्षेत्र मे पार्टी को नही जिता पाये। वही मंडल स्तर की बात करे तो भाजपा के पांच मंडल मे से तीन मंडल पर कांग्रेस व दो मंडल पर भाजपा को बढत मिली।
सरदारपुर मंडल पर भाजपा को करीब चार हजार मतों से पीछे रही तो लाबरिया-राजोद मंडल पर भी 3 हजार से अधिक मतो से पार्टी पीछे रही । राजगढ़ ग्रामीण मंडल मे भी पार्टी  1500 के करीब मतों से कांग्रेस  से पीछे रही।


राजगढ़ मंडल मे राजगढ़ नगर मे पार्टी को मिली एक तरफा बढत से जरूर भाजपा को यहां पर 2900 से अधिक मतों की बढ़त मिली तो अमझेरा -दसाई मंडल मे भी करीब 2400 मतों की बढ़त भाजपा को मिली।

सबसे कम और अधिक मत वाले बूथ- कांग्रेस को सबसे अधिक मत बूथ 29 रूणी मे 906 मिले यहा पर भाजपा को 214  मत मिले । वही भाजपा को सबसे अधिक मत बरमंडल के बूथ क्रमांक 41 पर 830 मत मिले तो कांग्रेस को यहां पर 170 मत मिले।
वहीं कांग्रेस को सबसे कम मत अमझेरा के बुथ क्रमांक 259 पर 53 मत मिले तो भाजपा को यहां पर 459 मत मिले। भाजपा को काकडपाडा के बूथ क्रमांक 131 पर सबसे कम 14 मत मिले तो कांग्रेस को यहां पर 132 मत  मिले।  कांग्रेस को 7 बुथ पर 100 से कम मत मिले तो भाजपा को 36 बूथों पर 100 से कम मत मिले।


तीसरे  मोर्चे का नही हो पाया उदयः- सरदारपुर मे मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस मे ही होता आया है। इस बार जरूर जयस के राजेंद्र गामड़ के मैदान मे उतरने से कयास लगाये जा रहे थे कि वही 10 हजार के करीब मत ला सकता  सरदारपुर विधानसभा मे तीसरे मोर्चे की राह खोल देगे ऐसा नही हो सका। राजेन्द्र गामड़ को 2940 मत मिले तो नोटों को भी 2126 मत मिले। वही एक अन्य निर्दलीय रेवाशंकर सिंघार को 1342 मत मिले।
निर्दलीय राजेंद्र गामड़ को सबसे अधिक मत  सलवा के बूथ 28 पर 111 व कछावा खेड़ी के बूथ क्रमांक 29 पर 107 मत मिले। 10 बूथ पर गामड को एक भी मत नहीं मिला।
सोन्याखेडी के बुथ 88 पर रेवाशंकर सिंघार को सबसे अधिक 21 मत मिले वही  10 मतदान केंद्रो पर उनका खाता भी नही खुल पाया। मिंडा के 248 बुथ क्रमांक पर नोटा को सबसे अधिक  25 मत मिले। वही पोस्टल आर्डर मे भी नोटा को 5 मत मिले।


राजगढ व सरदारपुर नगर पंचायत मे भाजपा को बढत- राजगढ नगर मे भाजपा ने सभी 18 बूथों पर लीड ली। जबकि पिछले चुनाव मे यहा भाजपा को 11 व 7 बूथ पर कांग्रेस को बढ़त मिली थी। राजगढ़ के 18 बूथों पर भाजपा को 7199 मत वही कांग्रेस को 4309 मत मिले इस प्रकार भाजपा यहा पर 2890 मतो से आगे रही।
सरदारपुर नगर की बात करे तो 2018 मे भाजपा व कांग्रेस दोनों ने तीन-तीन बूथों पर बढ़त ली थी ।जबकी 2023 मे भाजपा को 4 व कांग्रेस को 2 बुथो पर बढत मिली। सरदारपुर मे कांग्रेस को 1658 व भाजपा को 2067 मत मिले इस प्रकार भाजपा को यहा पर 409 मत की बढत मिली।
बडे ग्रामो मे भाजपा को अच्छी बढत लेकिन मजरो ने धवस्त कर दी बढतः- राजोद,लाबरिया,बरमंडल,रिंगनोद,दसाई,अमझेरा जैसे बडे ग्रामो मे भाजपा को अच्छी खासी बढत मिली लेकिन मजरो टोलो मे एकतरफा कांग्रेस को बढत मिले से इन बढे गांवो मे मिली बढत धवस्त होती गई।


राजोद मे जहां भाजपा को 2902 मत मिले वही भाजपा को 1893 मत मिले इस प्रकार भाजपा ने यहा पर 1009 मतों की बढ़त ली। लाबरिया मे भाजपा को 1880 व कांग्रेस को 687 मत मिले इस प्रकार भाजपा को 1193 मतों की बढ़त मिली। लेकिन मजरो मे कांग्रेस को अच्छे मत मिलने से बढत आधी रह गई। 3 मजरो के बूथों पर कांग्रेस को 1422 व भाजपा को 271 मत मिले। इस प्रकार कांग्रेस को 1151 मतो की बढ़त मिली। पंचायत क्षेत्र की बात करे जो भाजपा को 42 मत की ही लीड मिल पाई।
बरमंडल के 3 बुथ पर भाजपा को 1527 मत मिले वही कांग्रेस को 640 मत मिले। इस प्रकार भाजपा को 887 मतों की बढत मिली। मजरो की बात करे तो यहा पर कांग्रेस को 982 व भाजपा को 395 मत मिलंे। इस प्रकार कांग्रेस  को 587 मतो की बढत मिली। पंचायत क्षैत्र मे भाजपा की बड़त घटकर 300 मतो ही रह गई।

खुटपला मे कांग्रेस को 922 व भाजपा को 1253 मत मिले इस प्रकार भाजपा को यहा पर 331 मतो की लीड मिली। दत्तीगांव के दोनो बूथों पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। कांग्रेस को यहां पर 810 मत व भाजपा को 587 मत मिले इस प्रकार 223 मतों की बढ़त कांग्रेस को मिली।
दसाई के आठो बुथो पर भाजपा को लीड मिली। भाजपा को यहा पर 3697 व कांग्रेस को 2177 मत मिले इस प्रकार भाजपा को यहां पर 1520 मतो की बढ़त मिली। अमझेरा मे भी भाजपा को भारी बढत मिली। यहा पर 2018 के चुनाव मे 6 पर भाजपा व 3 पर कांग्रेस आगे थी। जबकी 2023 के चुनाव मे भाजपा को 8 व कांग्रेस को 1 बुथ पर बढत मिली। भाजपा को 3510 व कांग्रेस को 1866 मत मिले इस प्रकार भाजपा यहा पर 1644 मतो से आगे रही।
रिंगनोद मे भाजपा को  2090 व कांग्रेस को 1579 मत मिले इस प्रकार भाजपा यहा पर 511 मतो से आगे रही।


धुलेट के सभी बुथो पर भाजपा आगे रही। यहा पर भाजपा को 1712 व कांग्रेस को 1117 मत मिले इस प्रकार भाजपा को 595 मतो की बढत मिली। बोला मे भी भाजपा को अच्छी बढत मिली।  यहा पर कांग्रेस को 414 व भाजपा को 1006 मत मिले इस प्रकार भाजपा को 592 मतो की लीड मिली। फुलगावडी व साजोद मे जरूर कांटे का मुकाबला रहा। फुलगावडी मे भाजपा को 864 व कांग्रेस को 837 मत मिले इस प्रकार यहा पर 27 मतो की लीड से ही भाजपा को संतोष करना पडा।
साजोद मे भाजपा को 848 व कांग्रेस को 638 मत मिले यहा पर भाजपा 210 मतो से आगे रही।
छडावद और भानगढ़ मे भी भाजपा को अच्छी खासी बढ़त मिली। छडावद मे भाजपा को 1754 व कांग्रेस को 382 मत मिले इस प्रकार 1372 मतो से भाजपा आगे  रही।  वही भानगढ़ मे भाजपा को 1905 व कांग्रेस को 684 मत मिले इस प्रकार भाजपा को यहा पर भी 1221 मतों की बढ़त मिली ।


स्टार प्रचारकों का यह रहा असरः- विधानसभा चुनाव मे जहा कांग्रेस ने किसी भी स्टार प्रचारक की सभा नही की। विधायक ग्रेवाल ने जनसंपर्क मे ही विश्वास किया। वैसे पिछले चार चुनावो  की बात करे  तो एक भी चुनाव मे ग्रेवाल ने स्टार प्रचारक या किसी बडे नेता की सभा चुनाव के दौरान आयोजित की हो। अपनी व्यक्तिगत छबी एवं जनता से सीधे जुडाव के चलते ही वै जीत जाते है। चुनाव के पुर्व जरूर राजगढ मे प्रियंका गांधी की सभा हुई थी। लेकिन इस सभा का असर राजगढ नगर मे नही दिखाई दिया। व्यापारिक नगरी होने से राजगढ भाजपा का गढ रहा है। हर बार यहां पर भाजपा को बढत मिलती है इस बार भी यहां पर भाजपा को बढत मिली है। वही कांग्रेस को पिछले चुनाव की तुलना मे जरूर यहा पर 58 मतो का नुकसान हुआ है।


वही हर चुनाव मे भाजपा ने स्टार प्रचारकों की सभा कराई  है। 2013 के चुनाव मे लाबरिया मे सीएम शिवराज सिंह चौहान ने वेलसिंह भूरिया के पक्ष मे जनसभा ली थी जिसके बाद भाजपा यहां पर 500 से अधिक मतो से जीती थी। वही 2018 के चुनाव मे दसाई मे मुख्यमंत्री ने संजय बघेल के पक्ष मे सभा ली थी लेकिन 30 हजार से अधिक मतो से भाजपा को हार का सामना करना पडा। वही 2023 के चुनाव मे भाजपा के  लिये सीएम ने बरमंडल मे चुनावी सभा ली लेकिन 4 हजार से अधिक मतो से भाजपा को हार का सामना करना पडा। बरमंडल मे जहां सीएम ने सभा ली उस ग्राम पंचायत क्षेत्र मे भाजपा को पिछले चुनाव की तुलना मे मात्र 73 मतों की बढ़त मिल पाई। 2018 मे भाजपा को बरमंडल पंचायत क्षेत्र मे 1454 मत मिले थे वही 2023 मे  1527 मत मिले।


खैर यह तो आंकड़ों का विश्लेषण था।  लेकिन हार केे कारणों पर जरूर भाजपा संगठन मंथन करेगा। वैसे पार्टी के सूत्रों की माने तो संगठन स्तर पर होने वाली बैठक मे हार का प्रमुख कारण भीतरघात को लेकर स्वर मुखर होगे। लेकिन एक धडा यह भी कह रहा है की सभी को साथ मे लेकर चलने की रणनीति पर अमल नहीं किया गया नहीं तो परिणाम कुछ अलग होता। भीतरघात को खारिज करने के साथ ही कुछ नेता संगठन तक अपनी बात पहुॅचायेगे।

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