: सरदारपुर विधानसभा फतह करना भाजपा के लिए नहीं आसान,लाडली बहना योजना भले ही ट्रंप कार्ड साबित हो,लेकिन अंदरूनी गुटबाजी कमजोर कडी,संघ की पसंद को मिलेगी तरजीह,नये चेहरे को उतारकर गुटबाजी समाप्त करेगा शीर्ष नेतृत्व
Admin
Sat, Jul 8, 2023
आरिफ शेख
सरदारपुर। लाडली बहना योजना की सफलता से उत्साहित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनो पुरी तरह चुनावी मोड मे नजर आ रहे है। भले ही अभी तक के सर्वे एवं अंदरूनी फीडबैक के आधार पर प्रदेश मे भाजपा की सत्ता को बरकरार रखने के लिये जरूरी सीटों के आंकड़ों को लेकर पार्टी की स्थिति कमजोर बताई गई हो लेकिन कुछ विधायकों के टिकट काटने के साथ ही हारी सीटों पर नये चेहरे उतारने के फीडबैक के आधार पर बराबरी की टक्कर होने का आकलन सामने आने के बाद सत्ता एवं संगठन पूरी मजबूती के साथ मैदान मे उतरने की रणनीति पर कार्य कर रहे है।
वैसे तो प्रदेश मे सत्ता की सीढ़ी मालवा -निमाड़ अंचल ही माना जाता है जो भी दल यहा पर आगे रहता है वही सत्ता पर काबीज होता है। मालवा अंचल के धार जिले मे अभी तक के अंदरूनी सर्वे मे भाजपा की स्थिति को कमजोर बताया गया है लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लाडली बहना योजना एवं मुख्यमंत्री ब्याज माफी योजना के बाद मैदानी स्थिती के बदलने पर पुरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे है।
सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरदारपुर विधानसभा के मोहनखेड़ा मे लाडली बहना योजना मे लाडली सेना से संवाद कर रोड शो करेगे।
वैसे सरदारपुर विधानसभा कुछ अपवादों को छोड दे तो हमेशा कांग्रेस का अभेद गढ़ रहा है। मुकाम सिंह निगवाल ने करीब 17 हजार मतो से कांग्रेस के गणपत सिंह पटेल को हराकर कांग्रेस के इस अभेद गढ़ को भेदा था तो उसके बाद युवा नेता प्रताप ग्रेवाल ने जीत दर्ज कर फिर से कांग्रेस की झोली मे यह सीट डाल दी। लेकीन उसके बाद भाजपा के वैलसिंह भुरिया ने करीब 500 मतों से प्रताप ग्रेवाल को हराकर भाजपा का परचम लहरा दिया।
2018 मे एक बार फिर कांग्रेस ने किसान कर्ज माफी घोषणा को अच्छी तरह भुनाते हुए 30 हजार से भी अधिक मतो से जीत दर्ज की। हालांकि इस दौरान कांग्रेस को भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी का भी लाभ मिला। अब 2023 के चुनाव मे एक बार फिर भाजपा की राह सरदारपुर मे कठिन नजर आ रही है। जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं धार जिले की इस सीट को खास तवज्जो दे रहे है।
लाडली बहना ट्रंप कार्ड लेकिन अंदरूनी गुटबाजी कमजोर कडीः- भले ही सरदारपुर विधानसभा सीट भाजपा के लिये चुनौती है। लेकिन इसे फतह करना भी मुश्किल नहीं है। लाडली बहना योजना एवं किसान ब्याज माफी योजना भाजपा के लिये विधानसभा चुनाव मे ट्रंप कार्ड साबित होगे। लेकिन विधानसभा क्षेत्र मे पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को कमजोर कडी माना जा रहा है। पार्टी के निष्ठावान एवं समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से गुटबाजी बढी है। जिसका नतीजा निकाय चुनाव मे देखने को मिला है। वैसे पार्टी के रणनीतिकार मानते है की यदि समय रहते शीर्ष नेतृत्व पार्टी की गुटबाजी से पार पा लेगा तो भाजपा की चुनौती काफी हद तक आसान हो जायेगी।
नये चेहरे पर लगा सकती है दांव,संघ की तरजीह को मिल सकती है तवज्जो- हारी हुई सीटों को लेकर इस बार संगठन अगल रणनिती बना रहा है। जिसमे हारी हुई सीटों पर नये चेहरों को मैदान मे उतरने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। वही संघ की पसंद को भी उम्मीदवार चयन मे तवज्जो मिलने के संकेत दिये जा रहे है। वैसे इस बार सरदारपुर विधानसभा सीट पर भाजपा चौंकाने वाला चेहरे भी उतार सकती है। सूत्रों की मानें तो पार्टी गुटबाजी समाप्त करने के लिए पुराने के बजाय नये चेहरे को उम्मीदवार बनायेगी।
रणनितीकार इस गणित से मान रहे भाजपा की राह आसान- सरदारपुर विधानसभा वैसे तो आदिवासी बाहुल्य विधानसभा है। भील मतदाता यहा पर हमेशा निर्णायक साबित होते है। साथ ही मारू,सिर्वी,पाटीदार एंव अन्य समाज के मत भी अच्छी खासी तादात मे है। वैसे देखा जाये तो विधानसभा के बडे गांव रिंगनोद,राजगढ,राजोद,लाबरिया,बरमंडल,दसाई,अमझेरा जैसे गांवो मे भाजपा बढत बना लेती है लेकिन अंचल के मजरो मे कांग्रेस बढत लेकर भाजपा को हरा देती है। लेकिन इस बार पार्टी की रणनीति कुछ और है।
सरदारपुर विधानसभा मे 218855 मतदाता है जिसमे पुरुष मतदाताओं की संख्या 109156 है तो महिला मतदाता की संख्या 109691 है। सरदारपुर विधानसभा मे पिछले दो चुनावों के परिणाम देखे तो भाजपा का वोट बैंक जो करीब करीब फिक्स है उसका आंकडा 50 हजार के लगभग है। जो इधर उधर नहीं खिसकता है। यदि चुनाव मे 75 प्रतिशत के लगभग मतदान होता है तो यह आंकड़ा करीब करीब 163000 होता है। जिसमे करीब 80 से 85 हजार मत लाकर सरदारपुर विधानसभा सीट को फतह किया जा सकता है। पार्टी के रणनीतिकारों की माने तो लाडली बहना योजना एवं किसान ऋण ब्याज माफी योजना इस बार विधानसभा चुनाव मे भाजपा के लिए ट्रंप कार्ड साबित होगे।
जिस तरह पिछली बार कांग्रेस ने ऋण माफी की घोषणा कर किसानों के अधिक वोट हासिल किये थे। इस बार महिला एवं किसान भाजपा के साथ होगे।
सरदारपुर विधानसभा मे 54 हजार से अधिक महिलाओ को लाडली बहना योजना का लाभ मिला है। रणनीतिकारों की माने तो 54 हज़ार मे से आधे वोट भाजपा को मिल सकते है। पार्टी की फिक्स वोट बैंक 50 हजार प्लस लाडली बहना के 27 हजार वोट इस तरह करीब 77 हजार वोट भाजपा को मिल सकते है। यदि पार्टी अंदरूनी गुटबाजी से पार पा ले तो सरदारपुर विधानसभा चुनाव मे इस बार कांग्रेस और भाजपा मे कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।
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