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: परिवर्तन प्रकृति का नियम,राजनीति मे तीन राज्यों मे भाजपा का परिवर्तन कितना कारगर होगा लोकसभा चुनाव के बाद पता चलेगा,मोदी के मास्टर स्ट्रोक नई पीढ़ी का नेतृत्व तैयार करने की टैग लाइन से उड़ी क्षत्रपों के चेहरों की खुशिया  

सरदारपुर। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। जिससे हर कोई रूबरू होता है। लेकिन पिछले एक सप्ताह मे देश के तीन राज्य मप्र,राजस्थान और छत्तीसगढ़ की राजनीति मे जिस तरह नेतृत्व का परिवर्तन हुआ है उससे हर कोई आश्चर्यचकित है।  तीनो राज्यों मे भाजपा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आई थी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ मे जरूर प्रदेश के किसी चेहरे को आगे रखकर चुनाव नही लड़ा गया लेकिन प्रदेश मे मोदी के साथ शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा गया।

एक योद्धा की भांति करीब 160 से अधिक चुनावी सभाएं की दिन रात मेहनत कर 164 सीटों पर जीत दिलाकर जिस प्रचंड बहुमत से सत्ता बरकरार रखी उसमे कही ना कही मामा का जादु जरूर जनता पर चला होगा।
लेकिन जिस तरह पहले छत्तीसगढ़ मे मुख्यमंत्री के नाम ने चौकाया उसके बाद मप्र और अंत मे राजस्थान मे राजस्थान मे तो पहली बार के विधायक भजनलाल का प्रदेश की कमान सौंपकर सभी को चौका दिया। ये निर्णय केवल मोदी का मास्टर स्ट्रोक हो सकता है। मोदी एवं शाह की जोड़ी के इन चौंकाने वाले निर्णयों के पीछे जरूर कुछ कारण होगे शायद वे भाजपा मे एक नई राजनीति पीढ़ी तैयार करना चाहते हो यही नहीं इस बार तीनों प्रदेशों मे दो दो उपमुख्यमंत्री भी बनाये गये है जो बताता है की इसके पीछे भविष्य को लेकर कुछ खास रणनीति है।  


लेकिन जानकार कहते है की जिस तरह तीनो राज्यों मे वरिष्ठो को दरकिनार कर नई पीढ़ी  को सत्ता सौंपी वह भविष्य के लिये सही संकेत नहीं है। मप्र मे जिस तरह शिवराज सिंह चौहान की विदाई हुई है उससे शिवराज सिंह चौहान तो क्या प्रदेश का आम मतदाता भी हैरान है। हर किसी के मन मे शिवराज सिंह चौहान के प्रति सहानुभूति नजर आ रही है। भले ही पॉच  साल न हो लेकिन एक वर्ष तक कम से कम शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश के मुखिया के तौर पर कमान सौंपकर उनके नेतृत्व मे ही प्रदेश मे लोकसभा चुनाव लड़ा जाना चाहिए था।


चुनावी सभा मे जरूर शिवराजसिंह चौहान ने कई  बातें कहकर सभी को चौंकाया था की मै चुनाव लडू या ना लडु । वही विदाई वेला पर दिल्ली जाने के मीडिया के सवाल पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा की अपने लिए कुछ मांगने के बजाय मर जाना पसंद करूंगा । कहने को तो यह एक वाक्य भर है लेकिन इसके कई अर्थ है। विदाई पर जिस तरह बहने उनसे लिपटकर रो रही थी वह दृश्य भी काफी मार्मिक था।

यही नहीं कुछ बहने तो यह भी कह रही थी की हमने तो आपको देखकर वोट दिया था। यानी प्रदेश मे भाजपा की सत्ता बरकरार रखने मे लाडली बहना योजना का पूरा योगदान था।
वैसे तो मोदी का मास्टर स्ट्रोक का पता तीनो राज्यों मे लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद ही पता चलेगा की भाजपा के लिये यह परिवर्तन कितना कारगर हुआ। 

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