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: लाडली बहना व मोदी की ग्यारंटी के बाद धार जिले की हार ने भाजपा को आत्ममंथन पर किया मजबुर,मनावर,बदनावर व सरदारपुर मे भाजपा को अपनो से मिली हार,धार मे वर्मा ने बता दिया टाइगर को हराना आसान नहीं

धार। प्रदेश मे विधानसभा चुनाव मे भाजपा ने जहा उमा भारती के बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व मे बड़ी जीत दर्ज कर सभी को चौका दिया। एक वर्ष से जहां कांग्रेस तो ठीक भाजपा भी इतनी बड़ी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं थी। तमाम सर्वे और ओपिनियन पोल मे खराब  प्रदर्शन के बाद जहा भाजपा ने लाडली बहना योजना एवं सस्ता गैस सिलेंडर जैसी योजनाएं लागू कर एंटी एंबेसी को कम किया तो मोदी व शाह की रणनीति भाजपा की जीत मे कारगर रही।

आचार संहिता के पूर्व कमजोर सीटो पर प्रत्याशी तय करने के साथ ही कद्दावर नेताओं को भी चुनाव मैदान मे उतारकर कांग्रेस की सारी रणनीतियों को ध्वस्त कर दिया। मालवा-निमाड़ अंचल मे पिछले चुनाव की तुलना मे भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। इंदौर मे तो 9 मे से 9 सीटों पर भाजपा की बडी जीत ने सभी को चौका दिया। अधिकांश चुनावी रणनीतिकार इंदौर मे भाजपा को 5 से 6 सीटों पर ही जीतने के दावे कर रहे थे। यही नहीं इस बार मोदी की आंधी मे भाजपा के बागी भी जीत की राह मे रोडा नही बन पाये देपालपुर,बुरहानपुर एवं धार इसके सबसे बड़े उदाहरण है। इन सीटों के बारे मे कहा जा रहा था की यहाँ पर बागीयो के कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा लेकिन ऐसा कुछ नही हो पाया।


मालवा अंचल धार मे जरूर हार से भाजपा मे निराशा का माहौल होने के साथ ही आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है। कुक्षी एंव गंधवानी तो कांग्रेस के गढ़  है। यहां पर हार ने भाजपा को इतना चिंतित नही किया जितना मनावर,बदनावर व सरदारपुर की हार ने किया है। तीनो सीटों पर भाजपा अपनो से ही हारी है। यदि इन सीटों पर अंदरूनी बगावत नही होती तो धार जिले मे पांच सीटों पर जीत जाती है।


धार मे विक्रम वर्मा ने फिर बता दिया है टाईगर अभी जिंदा  है उसे इतनी आसानी से हराया नहीं जा सकता है। भाजपा के जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रहे राजीव यादव ने बगावत कर वर्मा को हराने के लिये मैदान मे उतरे थे। भाजपा के कई नेताओं के साथ धार नगर पालिका के कई पार्षदों ने खुलकर मैदान मे उतरकर राजीव यादव का साथ दिया लेकिन भाजपा प्रत्याशी नीना वर्मा को नहीं हरा सके ।


बदनावर मे हजारो करोडो  के विकास  कार्यों के बाद भाजपा की हार ने जरूर चौंकाया है। वैसे यहां पर मुकाबला शुरू से ही कांटे का था और परिणाम भी उसी के अनुरूप आया। वैसे राजनीतिक पंडितों को अनुमान सही निकला यहा पर भाजपा की ओर से अगर कोई मैदान मे था तो केवल दत्तीगांव यदि भाजपा के तमाम दिग्गज दत्तीगांव का कंधे से कंधा मिलाकर साथ देते तो भाजपा यहां पर भी एक बड़ी जीत दर्ज कर सकती है।


सरदारपुर मे वेलसिंह भूरिया ने जरूर टक्कर दी। लेकिन भीतरघात के कारण पराजय का सामना करना पडा। वैसे पूरे चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी वेलसिंह भूरिया के चेहरे पर वह खुशी नहीं थी उन्हे पहले ही अंदरूनी बगावत का आभास हो गया था। वैसे यहां पर संगठनात्मक बिखराव भी देखने को मिला।


मनावर मे युवा प्रत्याशी शिवराम कन्नौज ने पहला चुनाव लड़कर जिस तरह टक्कर दी इससे उनका राजनीतिक भविष्य उज्जवल होने वाला है। भाजपा को मनावर मे बड़ी जीत की उम्मीद थी लेकिन यहां पर भी पार्टी को भीतरघात का सामना करना पडा है। 

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