ब्रेकिंग

पेड़ पानी को सीधे धरती में उतारने का कार्य करती हैं- प्रभारी मंत्री विजयवर्गीय

नाना देवी मंदिर में लाखों के आभूषण चोरी,पुलिस जुटी जांच में

दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा किया विरोध प्रदर्शन

बाल लैंगिक शोषण रोकने को लेकर शिक्षकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण, 140 प्रतिभागी हुए शामिल

अक्षय तृतीया पर होंगा राजपूत समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन

सूचना

श्रीमद्भागवत कथा में हुआ कृष्ण और रुक्मणी विवाह प्रसंग : जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मणी विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती - शास्त्री

Bakhtavar Express

Wed, Jul 30, 2025

बरमंडल।श्रीमद्भागवत कथा में छठवें दिन हुआ कृष्ण और रुक्मणी विवाह प्रसंग, सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु, भगवान श्रीकृष्ण के लगाए जयकारे

श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन पंडित देवकिनंदन शास्त्री ने महारास लीला, रासलीला में भगवान शंकर का आना एवं श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह के प्रसंग का सुंदर वर्णन किया। इस अवसर पर पंडित शास्त्री ने रास पंच अध्याय का वर्णन करते हुए कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय कथा का श्रवण कराया गया।कथावाचक पंडित शास्त्री ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला द्वारा ही जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ।भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। रुक्मणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान कथा मंडप में विवाह का प्रसंग आते ही चारों तरफ से श्रीकृष्ण-रुक्मणी पर जमकर फूलों की बरसात हुई।पं.शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। उन्होने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है, तो वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे,

श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन सुनाया गया श्रीकृष्ण रासलीला का प्रसंग

श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन की कथा प्रारंभ करते हुए कथा वाचक पंडित शास्त्री ने भगवान की अनेक लीलाओं में श्रेष्ठतम लीला रास लीला का वर्णन करते हुए बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामथ्र्य के साथ आक्रमण किया लेकिन वह भगवान को पराजित नहीं कर पाया उसे ही परास्त होना पडा। रासलीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है। गोपी गीत पर बोलते हुए कथा व्यास ने कहा जब-जब जीव में अभिमान आता है भगवान उनसे दूर हो जाते हैं। जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है उसे दर्शन देते है। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ। समिति अध्यक्ष अनिल पाटीदार,उपाध्यक्ष महेश जाट ,मुन्नालाल पाटीदार, कन्हैयालाल पाटीदार,मोतीलाल पाटीदार (सरपंच) ,हरिनारायण पाटीदार, रमेशचन्द्र जायसवाल ,दिनेश पाटीदार,घनश्याम नायक ,वजेसिह नायक,शंकरलाल पाटीदार,अशोक जाट,करणसिह बगडावत, मनिष पाटीदार कोद,सहित चिराखान, पदमपुरा, बालोद,खुंटपला व दसाई के बड़ी संख्या में श्रृद्धालु अमृत रूपी कथा का रसपान कर रहे हैं।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें