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: खिलेड़ी के प्राथमिक विद्यालय का भवन तेज बारिश से हुआ क्षति ग्रस्त,

Admin

Fri, Sep 22, 2023

खिलेडी।पिछले दिवस में हुई भारी बारिश ने धार जिले के कई निजी मकानों को नुकसान तो पहुचाया था लेकिन अब धीरे धीरे नुकसानी के सर्वे में शासकीय भवन भी आ रहे है। ऐसा ही एक भवन खिलेड़ी प्राथमिक शाला का है वो अपना दम तोड़ते नजर आ रहा है। खिलेड़ी में ग्राम के बीच एक प्राथमिक शाला थी जिसमे कई विद्यार्थियों ने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करी थी तथा कई शिक्षक इस प्राथमिक शाला से सेवा निवृत्त होकर जा चुके है। मतलब साफ तोर से देखा जाए तो कई ग्रामीण इसी शाला से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करके आज वयस्क अवस्था से गुजर चुके है। लेकिन जब खिलेड़ी में विद्यालय के रूप में नवीन भवन निर्माण होने के बाद शालाएं अन्यत्र लगने लगी और देखते देखते यह प्राथमिक शाला कबाड़ बना दी गई। नतीजा यह रहा कि आज बारिश में भवन खण्डहर बन गया। जो हवा में टिका हुआ माना जा सकता है क्योंकि भवन की एक दीवार गत दिनों बारिश के थमने के बाद गिरी है अब बची दीवारे कैसे या किस पर गिरेगी कोई अंदाजा नही लगाया जा सकता है। अगर दीवार कहि गिरती है तो जन हानि हो सकती है।

*पंचायत ने किया दिखावा*

जब बारिश थमने के बाद दीवार गिरी तो सरपंच उपसरपंच सचिव आदि में दिखावा करते हुए आनन-फानन में यहाँ से लेकर वहां तक सब विभागो को सूचना दी। मतलब बीआरसी,  संकुल प्राचार्य, जनपद पंचायत बदनावर आदि सभी को सूचना देने की बात सामने आई है। लेकिन बारिश के मौसम में जर्जर भवनों के सम्बंध में  जिला स्तर पर पहले ही रिपोर्ट तैयार कर ली जाती है जिसमे ज़िले के अधिकारी कर्मचारी जर्जर निजी  मकानो तक को चिन्हित कर लेते है पर एक छोटे से गांव में पंचायत कर्मी शासकीय भवन को चिह्नित नही कर पाए जबकि यह आम रास्ते पर था।

*ग्रामीणों ने खड़ा किया प्रश्न चिन्ह*

अगर शिक्षा विभाग इन भवनों के मालिक है तो देख रेख कर इस भवन का उन्नयन क्यो नही करवाया। कहि न कहि यह भवन उक्त विभाग के काम मे ही आता साथ ही कुछ ग्रामीण खिलेड़ी के शिक्षा कर्मियों पर प्रश्न करते हुए कह रहे है कि अगर इस भवन का उपयोग नही करना था इस भवन को सम्बंधित विभाग से पहले ही धराशायी करवा देते कम से कम कोई अन्य सरकारी भवन तो गांव में बन जाता। कई सरकारी भवन गांव के बाहर बने है जो वृद्धजन को गांव से बाहर जाने में दूर मालूम पड़ते है।

*भवन क्या बिखरा, बिखर गए ऊपर से नीचे तक शासकीय कर्मचारि*

1. जब खिलेड़ी के इस प्राथमिक भवन की ढहने की बात को लेकर जिम्मेदार कर्मचारियों से चर्चा की तो तब सबके विचित्र जवाब सुनने को मिले।

भवन ढहा है इसके लिए हमने बीईओ बदनावर को सुचित किया है। वही हमने डीइओ धार को भी सूचित कर दिया है। जल्द ही इस भवन की जगह को लोक निर्माण विभाग की टीम के माध्यम से धराशायी किया जा सकता है हमने सब जगह सूचना दे दी है।अगर शासन द्धारा भविष्य में कोई नया प्रारूप आने पर यह जमीन उस प्रारूप पर आधारित भवन बनाने के काम मे ली जा सकेगी जिसमें भवन की कैटेगरी कोई सी भी हो सकती है वह चाहे मिनी आंगनवाड़ी हो या फिर किसी अन्य शासकीय भवन की स्वीकृति हो।

*कैलाश निगम सचिव ग्राम पंचायत खिलेड़ी*

2. वही जब विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बदनावर से सम्पर्क किया गया तो नेटवर्क अनुपलब्ध होने से सम्पर्क नही हो पाया। जिस पर सुशीला टैगोर प्राचार्य खिलेड़ी से चर्चा करने पर उन्होंने बड़ा ही विचित्र उत्तर देते हुए कहा कि खिलेड़ी में जो प्राथमिक शाला ढही है उसको मेने देखा तक नही है। उत्तर से मतलब साफ है कि चार्ज लेने के पूर्व कोई शासकीय कर्मचारि उसके पद और क्षेत्र दायरे का अवलोकन करने की इच्छा ही नही रखता है।

3. खिलेड़ी की प्राथमिक शाला जो जीर्ण शीर्ण है वह हमारी बिल्डिंग नही है। वह लोक निर्माण विभाग की है कई साल पुरानी है इसकी वस्तु स्थिति जनशिक्षक देख चुके है हमने जनपद बदनावर व डीईओ को लिखा है। भवन को धराशायी करवा देंगे। 

*नाहरसिंह नरगेस संकुल प्राचार्य कड़ोदकलां*

4. लोक निर्माण विभाग की कोई बिल्डिंग नही होती है हम तो बनाते है अर्थात निर्माण एजेंसी है। खिलेड़ी क्या बदनावर में कही लोक निर्माण विभाग के नाम से भवन नही है। दूसरी बात अगर हम लेटर मिलेगा तो हम उक्त जर्जर प्राथमिक शाला को धराशायी करने का जिम्मा ले कर कार्य कर देंगे। अभी तक कोई आवेदन हमे प्राप्त नही हुआ है।

*संजय जैन एसडीओ पीडब्ल्यूडी बदनावर*

 ये सब बातें तो एक दूसरे के सिर ठीकरा फोड़ने जैसी है कोई कहता है आवेदन दे दिया है कोई कहता है उस विभाग का भवन है मै तो कहता हूं कि इसमें शिक्षा विभाग के कर्मी कार्यरत थे। तो जिम्मेदारी इनकी बनती है कि इसी विभाग से इसका निपटारा करवाया जाए क्योंकि जनहानि अगर होती है तो सारे विभाग पीड़ित को फजीहत में डाल सकते है। बेहतर यही होगा कि जिम्मेदार विभाग पीडब्ल्यूडी को आवेदन कर भवन का निपटान करवाये और भवन की जगह पर सीमांकन कर शासकीय भूमि में आरक्षित की जाए। जब जरूरत होगी इस भूमि को काम मे लिया जा सकेगा।

*अनिल पाटीदार ग्रामीण*

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