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सफल उपचार : भैंस के गर्भाशय प्रोलैप्स का सफल उपचार करके पशु चिकित्सक डॉ गामड़ ने भैंस को जीवन दान दिया

Bakhtavar Express

Tue, Dec 9, 2025

सरदारपुर। सोमवार की बिती रात में भैंस के गर्भाशय प्रोलेप्स का कडी मेहनत और तत्परता से सरदारपुर विकास खंड पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ दिलीप गामड द्वारा सफल उपचार करके भैस को नव जीवन दिया गया। मामला नगर के समीप गांव बडवेली के पशुपालक और किसान कैलाश पाटीदार के यहाँ का है। पशुपालक पाटीदार ने बताया कि सोमवार की बिती रात 3 बजे भैस के डिलीवरी के तुरंत बाद गर्भाशय बाहर आने से हम घबरा गए, जिससे भैंस की जान का खतरा देखते हुए रात्री में ही दूरभाष पर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी दिलीप गामड को सूचना देकर बुलवाया गया। डाक्टर की कड़ी मेहनत तत्परता से कठिन परिस्थितियों में गर्भाशय को सही स्थिति में लाकर सफल उपचार करके जान बचा ली गई। इधर चिकित्सा अधिकारी गामड़ से चर्चा करने पर बताया कि डिलीवरी के बाद जब भैंस या गाय का गर्भाशय उलटकर शरीर के बाहर आ जाता है, उसे गर्भाशय प्रोलैप्स कहा जाता है। यह स्थिति आपातकालीन होती है, और तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। प्रोलैप्स क्यों होता है, पर बताया कि कठिन या लंबी डिलीवरी, प्रसव के समय अत्यधिक जोर लगना, कैल्शियम की कमी (हाइपोकैल्सीमिया) अधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुओं में कमजोरी, फिसलन या चोट, साफ-सफाई का अभाव इसलिए प्रोलेप्स होता है।

पशुओं में जान का खतरा कैसे होता है?

पर बताया कि यदि समय पर उपचार न मिले तो - गर्भाशय सूजकर क्षतिग्रस्त हो सकता है

अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता है

संक्रमण (सेप्टीसीमिया) फैलकर पशु की जान भी जा सकती है,

पशु खड़े नहीं हो पाते और शॉक की स्थिति बन जाती है। इसलिए प्रोलैप्स हमेशा इमरजेंसी माना जाता है। चिकित्सा अधिकारी डॉ गामड ने पशुपालकों के लिए जागरूकता हेतु बताया कि

प्रसव के तुरंत बाद पशु पर विशेष ध्यान दें, यदि गर्भाशय बाहर दिखाई दे तो बिल्कुल देरी न करें, तुरंत नज़दीकी पशु चिकित्सक को सूचना दें, बाहर आए हिस्से पर मिट्टी या गंदगी न लगने दें, साफ कपड़े से ढककर पशु को शांत रखें, प्रसव से पहले एवं बाद में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करें। विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ गामड के तत्परतापूर्वक उपचार के साथ भैस की जान बचाए जाने की प्रशंसा पशुपालकों द्वारा की जा रही है।

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