श्रीमद् भागवत कथा : जहां तक आपका नाता है ये पुण्य वंहा तक जाएगा, कथा में बैठा व्यक्ति श्रोता व भक्त बन जाता है - कमलकिशोर जी नागर
Bakhtavar Express
Thu, Apr 16, 2026
पिंजराया की कथा में कलयुगी बेटों के माता पिता के प्रति रवैयो पर नागर जी की आंखो से बही अश्रुधारा

बदनावर।बुरा करने वाले का ढ़ोल पुरे नगर में पिट जाता है, दुष्प्रचार जल्दी व सारे जहां में फेल जाता है।जहां तक आपका नाता है ये पुण्य वंहा तक जाएगा। गोहिल परिवार ने यह वैशाख सुधार दिया। आप साधुवाद के पात्र है।अभी हम संसारी है जिन्होंने स्वयं को ईश्वर को सौंप दिया व न स्त्री बनता है न पुरुष बनता है।जों भगवान के हो जाते है फिर स्त्री,पुरुष, पौत्र हो वो सब भगवान के ही हो जाते है। व्यक्ति घर छोड़ने पर रिस्तेदार के यंहा मेहमान, बस में यात्री, डाक्टर के यंहा मरीज, दुकान पर ग्राहक, रात्रि में किसी के यंहा घुसे तो चोर और कथा में बैठे तो श्रोता और भक्त हो जाता है। घर छोड़कर कथा में जाओगे तो भगवान मिलेगा। यह आपको तय करना है की घर छोड़कर कँहा जाना है। उठते ही प्रभु के दर्शन करो।
उक्त सारगर्भित व जीवन सार्थक विचार समीप गांव पिंजराया में गोहिल परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत के छठे दिन व्यास पीठ से कथावाचक पंडित कमलकिशोर नागर ने व्यक्त किए। कथा के प्रारम्भ में आयोजक रतन सिंह गोहिल, सुपुत्र मनोहर सिंह एवं इन्दर सिंह गोहिल ने सपत्निक पोथी व कथावाचक की पूजा अर्चना की। परिजनों ने मंच से ही कथा श्रवण करने आए श्रद्धालुओं को नमन कर अभिवादन किया।
सिंदूर लगाने वाले ने साथ छोड़ दिया लेकिन चन्दन वाले ने नहीं छोड़ा
नागर जी ने कहा की भेंट द्वारका से चुनरी की उत्पत्ति हुई। मीरा के नाम पर समर्पित हुई चुनरी तब से आज दिन तक लाल व पिली चुनरी के रूप में प्रचलित है।तुलसीदास जी ने 1 अरब नाम जपे थे, उद्धव जी जन्म लेते ही राम नाम जपे थे।जब समय हो जपते रहो।सिंदूर लगाने वाले ने साथ छोड़ दिया लेकिन चन्दन वाले ने साथ नहीं छोड़ा है। जिसके कपाल पर चन्दन दीखता है ईश्वर के उसके साथ होने की निशानी है। शेर, सांप व सोते हुए को कभी मत जगाना। कथा प्रसाद है इसे श्रद्धा से प्रसाद की तरह ले लो। व्यक्ति कभी कभी ऐसे कर्म करता है की वो देखने लायक नहीं होते है जीवन में ऐसे कर्म कभी मत करो की ईश्वर देखे लेकिन वो देखने लायक नहीं हो।दिखावा मत करो, अच्छा कार्य करो। दाये हाथो किया कार्य बांये को पता नहीं चलना चाहिए। लोग अच्छे होने का ढ़ोल पिट रहे है लेकिन अपने बुरे कर्मो को कोई नहीं स्वीकारता है।
कलयुगी बेटों पर नागर जी की आंखो से बही अश्रुधारा
कथा के छठे दिन माँ और बेटे के बचपन के निश्छल स्नेह का प्रसंग सुनाया तो नागर जी के साथ अनेक महिला पुरुषो की आंखो से अश्रुधारा बह निकली।जिसने नहलाया, खिलाया, दूध पिलाया और बोलते सिखाया ऐसे कई नालायक बेटे है जों अपनी माँ से बोलते नहीं है पारिवारिक लड़ाई में महाभारत हो गई युद्ध में सेकड़ो मौत के मुंह में समा गए, लेकिन अपनों से बोलचाल बंद नहीं हुआ।
युद्ध के भी नियम थे। घर में लड़ लेना लेकिन घर की बात बाहर मत ले जाना।जों बेटे माता पिता व कथा के संपर्क मे है उनका जीवन धन्य है।
संसार में जों अपने दिख रहे है वो आपके नहीं है, केवल भजन और भगवान ही आपके है - गोविन्द जी नागर
कथा के छठे दिन बाल संत कथावाचक पं. गोविन्द जी हाटकेश नागर ने अतिरिक्त व्यास पीठ से विचार व्यक्त करते हुए कहा की भजन करने से ही संसार का बंधन टूटेगा, माया के बंधन में बंधकर परमात्मा का भजन नहीं कर पाते है। संसार यही है हम सब जन्म लेकर सहज़ रूप से आए लेकिन जाने की बारी आई तो बहुत कठिनाई आई है। जन्म लेकर आने पर सुविधा थी. जाने के समय नाते रिश्ते, काम क्रोध लोभ मोह,वासना आदि के मोहजाल में उलझ गया।परमात्मा ने चेतावनी दे दी की अकेला आया था अकेला जाएगा, सांसारिक मोहमाया साथ नहीं जाएगी।जन्म लेकर जीवन बढ़ने लगा जिम्मेदारी बढ़ने लगी, सांसारिक मोहमाया के दलदल में उतरता गया इससे निकलने की कोशिश की लेकिन नहीं निकल पाए। जैसे आए थे वैसे ही खाली हाथो जाना है। संसार में जों अपने दिख रहे आपके वो अपने नहीं है केवल भजन और भगवान ही आपका है जों आपके साथ जाएगा। प्रभु उसकी ही नया पार लगाता है, जों भजन कथा मे बैठता है। जों ऐंठने व लूटने में लगा है उसकी नैया कभी पार नहीं होगी।जब जन्म लेकर संसार में आए थे तब घुटने घुटने पानी था यानि सुख सुविधा लाड़ दुलार था लेकिन अब जाने की बारी आई तब सिर के ऊपर से पानी जा रहा है यानि सांसारिक मोह माया, जिम्मेदारी का मोह नहीं छूट पा रहा है।
दर में रोज़ देखने से नागराज दिख सकते है तो मंदिर की और रोज़ देखने से भगवान क्यों नहीं दिखेंगे
हमारे जीवन को हमारी हद में रखे, जितनी कथाए सुनेंगे उतनी सुविधा होगी। दर, (बिल ) मंदर (मंदिर ) रोज़ रोज़ दर पर नजर रखने से नागराज के दर्शन हो सकते है तो मंदिर की दर पर नजर रखने से ईश्वर के दर्शन क्यों नहीं हो सकते है । कथा सुनते सुनते वो घड़ी आएगी और दर्शन दे जाएंगे। शबरी ने 10 हजार साल इंतजार किया और दर पर राम के दर्शन हो गए।धनवान, ज्ञानवान, बलवान मत बनना
लेकिन पुण्यवान जरूर बनना। दर और मंदर को कभी मत भूलना।
सेवाभावी दे रहे प्याऊ एवं निःशुल्क बस की सेवा
कथा प्रारम्भ दिवस से ही आयोजक गोहिल परिवार द्वारा कथा में शामिल श्रद्धालुओं को प्रतिदिन भंडारे में भोजन प्रसादी का लाभ लिया जा रहा है। जबकि सात दिवसीय कथा में पहले दिन से ही कथा सुनने वाले रसिक श्रोताओं के लिए भारतीय किसान संघ धार इकाई , मनासा, खेरोद, टकरावदा, कलसाडा, पिंजराया पंचायत, तीसगांव, चिढ़ावद, माचकदा के सेवाभावी सदस्य लगतार शीतल पेयजल से श्रद्धालुओं के कंठ तर कर प्यास बुझा रहे है।वंही खेरोद के एल एन एकेडमी विद्यालय के संचालक कपिल यादव द्वारा निजी बस एवं अन्य ट्रेक्टर वाहन मालिकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लगाकर श्रद्धालुओं को कथा स्थल तक लाकर श्रवण करवाने का लाभ लिया जा रहा है। सादलपुर पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजन स्थल पर उपस्थित होकर निरंतर सेवाए प्रदान की जा रही है।जानकारी गोवर्धन सिंह डोडिया खिलेड़ी एवं महेंद्र सिंह चावड़ा ने दी।
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