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​सिर्फ बातों से नहीं, एकजुटता से संवरेगा मंसूरी समाज- जाहिद मंसूरी

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बिरादरी के युवाओं को नेतृत्व सौंपने की उठी मांग : ​सिर्फ बातों से नहीं, एकजुटता से संवरेगा मंसूरी समाज- जाहिद मंसूरी

Bakhtavar Express

Wed, Apr 29, 2026

​भोपाल / बदनावर@ अल्ताफ मंसूरी।मध्यप्रदेश में मंसूरी समाज की उन्नति और एकजुटता को लेकर समाजसेवी जाहिद मंसूरी ने एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान समाज की वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि समाज के नाम पर चल रहे तमाम संगठन अब तक केवल 'नाम' और 'फायदे' की राजनीति में उलझे रहे हैं, जिससे समाज का जमीनी स्तर पर कोई भला नहीं हुआ। जाहिद मंसूरी ने कहा ​दिखावे की राजनीति से समाज का नुकसान होता हे ​जाहिद मंसूरी ने दुख जताते हुए कहा कि आज समाज में कई संगठन सक्रिय हैं, जिनमें से ज्यादातर उत्तर प्रदेश (U.P.) केंद्रित हैं। इन संगठनों के जिम्मेदारों ने अब तक केवल बातों से समाज को गुमराह किया है। उन्होंने कहा, "हार-फूल पहनकर नेता बनना आसान है, लेकिन जिम्मेदारी निभाना कठिन। आज भी समाज का गरीब तबका, बेवाएँ और विकलांग सरकारी मदद के लिए तरस रहे हैं। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद हम आज तक एक स्कूल, कॉलेज या शादी हॉल तक नहीं बना पाए।"उन्होंने ​युवाओं और शिक्षित वर्ग को आगे लाने की अपील करते हुए कहा ​समाचार के माध्यम से उन्होंने समाज के बुजुर्गों और वर्तमान पदाधिकारियों से अपील की है कि वे पदों का मोह छोड़ें। जो

​पदों पर कब्जा कार के कई सालों से एक ही पद पर जमे हुए हैं और नए चेहरों को मौका नहीं दे रहे। ओर ​शिक्षित युवाओं की उपेक्षा करते है, और काबिल और पढ़े-लिखे नौजवानों को नेतृत्व से दूर रखा जा रहा है, जिससे समाज में नई सोच और आधुनिक नजरिया नहीं आ पा रहा।

​एकता के अभाव में राजनीति में समाज का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

​एक मंच, एक लक्ष्य: वक्त की जरूरत

​जाहिद मंसूरी ने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अपनी आने वाली नस्लों को जवाब देना होगा। उन्होंने समाधान पेश करते हुए कहा कि:

​"अगर हम वाकई मध्यप्रदेश में समाज की तरक्की चाहते हैं, तो सभी संगठनों को अपना लालच और ईगो (अहंकार) छोड़कर एक मंच पर आना होगा। सभी जिम्मेदार एक टेबल पर बैठें, सलाह-मशविरा करें और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा का संकल्प लें।

​उन्होंने समाज के आम और खास, दोनों वर्गों से आह्वान किया है कि वे आगे आएं और समाज को एक सूत्र में बांधने का प्रयास करें। समाज के उत्थान के लिए बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ना, शिक्षा का प्रसार करना और शासन-प्रशासन में अपनी पैठ बनाना ही अब मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।

​समाजसेवी जाहिद मंसूरी की यह अपील पूरे प्रदेश के मंसूरी समाज में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह है कि समाज के वर्तमान 'रहबर' इस पर क्या रुख अपनाते हैं।

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